इन प्रत्याशियों के लिए स्वरा भास्कर ने किया प्रचार, हार के बाद बोलीं- पहले से ही जानती थी लेकिन…

लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला। इसी के चलते एक बार फिर मोदी सरकार सत्ता संभालने जा रही है। ये चुनाव वैसे तो कई मायनों में खास रहा लेकिन सबसे ज्यादा लोगों के निगाहें कुछ खास सीटों पर थीं। बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कन्हैया कुमार और आतिशी मार्लेना सहित कई लोगों के पक्ष में प्रचार किया लेकिन इन सभी को हार का सामना करना पड़ा। 

चुनाव | 1 year ago

हार के बाद कांग्रेस की पहली मीटिंग, ऐसी थी राहुल-सोनिया-प्रियंका की बॉडी लैंग्वेज


Election Results 2019 में लगे करारे झटके के बाद शनिवार (25 मई) को दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में हार पर मंथन हुआ। सूत्रों के हवाले मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी सौंपा था, लेकिन बैठक में शामिल दिग्गज पार्टी नेताओं ने इसे नामंजूर कर उनसे पद पर बने रहने की अपील की। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत तमाम दिग्गज मौजूद रहे। इस दौरान नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव हार का दर्द साफ बयां कर रहे थे।


पहले खुश दिखे राहुल-प्रियंकाः राहुल गांधी अपनी बहन और चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी रहीं प्रियंका गांधी के साथ बैठक में पहुंचे थे। बैठक में जाने के दौरान उनके चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट दिख रही थी। हालांकि मुस्कुराहट में भी हार का गम झलक रहा था।

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बाहर मुस्कुराते दिख रहे दोनों चेहरे बैठक में काफी मायूस नजर आए। राहुल गांधी बैठक के दौरान कई बार दोनों हाथों को जोड़कर ऊपर की तरफ देखते नजर आए। ऐसा लग रहा था जैसे वे हार के बाद अपने अगले कदम को लेकर गंभीरता से सोच रहे हो।

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बैठक में प्रियंका गांधी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए गए कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठी थीं। दोनों ही नेता अपनी-अपनी सीट पर भी हार गए हैं। प्रियंका के चेहरे पर यहां मायूसी साफ देखने को मिली। उनकी नजरें ज्यादातर समय अपने सामने रखे दस्तावेजों पर ही टिकी रहीं।


इस अंदाज में दिखे सोनिया-मनमोहनः यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच में राहुल गांधी बैठे हुए थे। सोनिया बैठक के दौरान सामान्य अंदाज में नजर आ रही थीं, वहीं मनमोहन सिंह भी अपने चिर-परिचित अंदाज में गंभीर मुद्रा में ही दिखे।

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गौरतलब है कि पिछले चुनाव में 44 सीटों पर सिमटी कांग्रेस को अबकी बार सिर्फ 8 सीटों की बढ़त मिल पाई है। इस बार आंकड़ा 52 तक पहुंचा है। हालांकि इस बार भी कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी है लेकिन विपक्ष के नेता का पद किसी को नहीं मिल पाएगा। इस चुनाव में राहुल, सिंधिया और कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री अपनी ही सीटें भी नहीं बचा पाए। राहुल को अमेठी में हार मिली, हालांकि वायनाड में वे जीत गए।

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चुनाव | 1 year ago

राहुल के 5 दावे जिन्हें जनता ने झूठा साबित किया

2019 के आम चुनावों के परिणाम हमारे सामने हैं. जैसा माहौल काउंटिंग के दौरान दिखा रहा है साफ हो गया है कि देश की लगभग सभी प्रमुख सीटों पर भाजपा बढ़त बनाए हुए हैं जिस कारण एनडीए मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है. बात अगर यूपीए की हो तो यूपीए कमजोर स्थिति में है. जिस हिसाब से नतीजे आ रहे हैं साफ हो गया है 2014 के बाद एक बार फिर देश ने कांग्रेस को सिरे से खारिज कर दिया है. पिछले 5 सालों में कांग्रेस की ऐसी स्थिति क्यों हुई?

बड़ी वजह राहुल गांधी को माना जा सकता है जिन्होंने चुनाव के लिए मुद्दे तो खूब उठाए. मगर जब उन मुद्दों को अमली जमा पहनाने का वक़्त आया, राहुल उठाए हुए उस मुद्दे को अधूरा छोड़कर किसी दूसरे और फिर तीसरे मुड़े पर आ गए.

जैसे परिणाम आए हैं साफ है कि उससे कांग्रेस और राहुल गांधी दोनों ही बेचैन होंगे.

कह सकते हैं कि यदि आज दोबारा भाजपा को देश की जनता ने प्रचंड बहुमत दिया है. तो उसकी एक बड़ी वजह वो अविश्वास है, जो जनता के दिल में राहुल गांधी द्वारा लिए गए अलग अलग यू-टर्न्स देखकर आया. एक कमजोर विपक्ष का होना एक अलग बात है. मगर गुजरे पांच सालों में यदि राहुल के मनोभावों का यदि गहनता से अवलोकन किया जाए तो मिलता है कि  अगर आज एक बड़े मैंडेट के रूप में भाजपा और पीएम मोदी दोबारा वापसी कर रहे हैं तो इसकी जिम्मेदार राहुल गांधी की वो गलतियां हैं, जिन्हें खुद कभी राहुल ने गलती की संज्ञा नहीं दी और जिन्हें उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनकी उपलब्धियां बताया.

भाजपा की इस बम्पर जीत और कांग्रेस एवं राहुल गांधी की पस्त हालत देखकर वो कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है जिसके अनुसार, ‘इंसान जो बोता है वही काटता है.’ वर्तमान परिदृश्य का अवलोकन करने और जैसी स्थिति कांग्रेस और राहुल गांधी की हुई है उसपर गौर पर हमें ऐसे तमाम कारण नजर आते हैं जो ये बताते हैं कि आखिर क्यों इस देश की जनता ने पुनः कांग्रेस को खारिज कर राहुल गांधी को बड़ा सबक सिखाने के बारे में विचार किया. कुछ और कहने, समझने से पहले आइये उन मुद्दों पर चर्चा कर ली जाए जिन्हें बीते 5 सालों में राहुल गांधी ने उठाया तो मगर जिन्हें भुनाने में वो बुरी तरह नाकाम रहे.

राफेल पर झूठ

बात बीते कुछ सालों के प्रमुख मुद्दों की हो तो राफेल एक ऐसा मुद्दा रहा जिसने खूब सुर्खियां बटोरीं. अपनी रैलियों में राफेल को लेकर राहुल ने सरकार को घेरना तो चाहा मगर उनका विरोध देशहित में न होकर व्यक्तिगत हित में था. अपनी रैलियों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील के मद्देनजर पीएम मोदी पर ताख हमले किये. राहुल ने अपने मंच से न सिर्फ पीएम मोदी पर हमला किया बल्कि अनिल अंबानी पर भी तरह तरह के इल्जाम लगाए. राहुल ने कहा कि रफेल मामले में प्रधानमंत्री ने अनिल अंबानी को सीधा फायदा पहुंचाते हुए उन्हें 30,000 करोड़ दिए.

बात क्योंकि रफेल की चल रही है तो हमारे लिए अभी बीते दिनों हुई उस प्रेस कांफ्रेंस का जिक्र करना भी बहुत जरूरी है जिसमें अमित शाह से राफेल मुद्दे को लेकर साल हुआ था. सवाल का जवाब देते हुए शाह ने राहुल की बातों को झूठा बताया था और कहा था कि अगर इस मामले में राहुल गांधी के पास जानकारी थी तो उन्हें उसे सुप्रीम कोर्ट को बताना चाहिए था. अमित शाह ने सवाल उठाया था कि जब राहुल के पास मामले को लेकर जानकारी थी तो उन्होंने उस जानकारी को कोर्ट से क्यों छुपाया.

अपनी पत्रकार वार्ता में अमित शाह ने इस बात को भी पूरे विश्वास से रखा था कि राफेल डील में कहीं भी न तो कोई कॉम्प्रोमाइज हुआ न ही किसी के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाना गया है. ध्यान रहे किराफेल पर राहुल ने बातें तो खूब की मगर ऐसी कोई ठोस बात जनता के बीच नहीं रख सके जिससे उन्हें या उनकी पार्टी को वोट मिलता.

एयर स्ट्राइक

चाहे उड़ी हमले के बाद लिया गया एक्शन या फिर पुलवामा हमले के बाद बालाकोट पर की गई एयर स्ट्राइक हो जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसला लिया उसके बाद माना यही गया कि देश सुरक्षित हाथों में है. उरी हमले के बाद अपने भाषण में राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी पर शहीदों के खून की दलाली करने का आरोप लगाया जिसका जनता ने जबरदस्त विरोध किया. राहुल को अपनी गलती का एहसास हुआ और अभी जब बीते दिनों ही भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की तो उस मामले पर राहुल चुप रहे और सरकार और सेना द्वारा लिए गए एक्शन का समर्थन किया.

माना जा रहा है कि देश की सेना द्वारा लिए गए एक्शन पर सवाल उठाने के कारण भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था जिसने राहुल गांधी को खारिज किया. नतीजा हमारे सामने हैं चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है.

नोटबंदी

गुजरे दो सालों में राहुल गांधी की किसी भी रैली का अवलोकन कर लीजिये मिलेगा कि वो मुद्दा जिसपर राहुल गांधी ने खूब हो हल्ला मचाया वो नोटबंदी था. इसे कैसे राहुल गांधी ने मुद्दा बनाने का प्रयास किया इसे हम उस घटना से भी समझ सकते हैं जब हमने राहुल गांधी को अपने गार्ड्स के साथ बैंक के बाहर कतार में देखा. तस्वीर वायरल हुई जिसमें राहुल 2 हजार के 2 नोट पकड़े हंसते मुस्कुराते बाहर आए.

बात अगर तब आई उस तस्वीर पर प्रतिक्रिया की हो तो एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था जिसने इसे राहुल का ड्रामा बताया था. माना जाता है कि जितनी हाय तौबा राहुल ने नोटबंदी को लेकर मचाई यदि उसके आधे में भी वो गंभीर होकर कुछ करते तो इसका फायदा न सिर्फ उन्हें बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी को मिलता.

चूंकि नोटबंदी को लेकर राहुल ने केवल और केवल ड्रामा ही किया है तो साफ हो जाता है कि इस चुनाव में उनके नकारे जाने का एक बड़ा कारण नोटबंदी के दौरान राहुल का रवैया था.

जीएसटी

किसी आम भारतीय के लिए जीएसटी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए गब्बर सिंह टैक्स. गुजरे साल की किसी भी रैली का अवलोकन कर लीजिये मिलेगा कि जीएसटी  भी एक ऐसा मुद्दा था जिसपर राहुल ने सरकार को घेरने का प्रयास तो किया मगर मुद्दे के साथ इंसाफ नहीं कर पाए. राहुल के इस बर्ताव से लोग नाखुश हुए और आज परिणाम हमारे सामने हैं. बात यदि  राजनीतिक विशेषज्ञों की हो तो वो भी यही मानते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी ऐसे मुद्दे थे जिनको यदि कांग्रेस या फिर राहुल गांधी ने गंभीरता से लेते हुए सही से कैश किया होता तो आज परिणाम कुछ और होते.

चौकीदार चोर है

बात अगर राहुल गांधी की हालिया रैलियों की हो तो राफेल को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए उन्हें ‘चोर है बताया था. बात जब प्रमाण देने की हुई तो कई अहम मौकों पर राहुल बगलें झांकते नजर आए. अब जबकि परिणाम हमारे सामने हैं और स्थिति शीशे की तरह साफ है तो इस बात का भी अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि लोगों को राहुल का रुख समझ नहीं आया है और कहीं न कहीं उन्होंने वही काटा है जो उन्होंने बोया था.

चुनाव | 1 year ago

विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने हार स्वीकारी, शाम को देंगे इस्तीफा


आंध्र प्रदेश में इस बार जगन मोहन रेड्डी का जादू चल गया है। रुझानों के अनुसार उनकी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस यहां जीत हासिल करती हुई दिख रही है। यहां 175 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं। वाईएसआर 148 सीटों से आगे चल रही है। जबकि टीडीपी महज 25 सीटों से आगे है।

अगर 2014 की बात करें तो तब चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सत्ता में आई थी। यहां 2014 में हुए चुनाव के बाद टीडीपी के हिस्से में 102 सीटें आई थीं। वाईएसआर कांग्रेस को 67 सीट, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 4 सीट, नवोदयम को एक और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार को मिली थी।

कौन थीं मुख्य पार्टियां?

मुख्य पार्टियों में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस थीं। इस बार चुनावों में तेलुगु फिल्मों के अभिनेता पवन कल्याण की जनता सेना पार्टी (जेएसपी) भी मैदान में उतरी थी। राज्य में भाजपा और कांग्रेस ने भी सरकार बनाने के लिए भरपूर कोशिश की। लेकिन लोगों का झुकाव स्थानीय पार्टियों की ओर अधिक रहा।

2014 के राजनीतिक समीकरण?

आंध्र प्रदेश में इस बार स्थिति पिछले चुनाव से काफी अलग है। 2014 में टीजडीपी और भाजपा के गठबंध की सरकार थी। इस गठबंधन को जेएसपी ने भी पूरा समर्थन दिया था। हालांकि उस वक्त जेएसपी ने किसी सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। इस बार ये पार्टी किसी को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

क्या अलग था 2019 में?


इस बार टीडीपी और भाजपा राजनीतिक संबंध तोड़कर मैदान में उतरीं। यानि इनका गठबंधन नहीं है। जेएसपी- बसपा, सीपीआई और सीपीएम के साथ गठबंधन करके पहली बार चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस भी यहां अकेले ही चुनाव लड़ रही है। वाईएसआर कांग्रेस की स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई। 


पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने जनता के लिए ‘प्रजा दरबार’ जैसी नई शुरुआत की। जहां उन्होंने किसानों, छात्रों और ग्रामीणों की परेशानियों को सुना।



वहीं रेड्डी का ये भी कहना है कि अगर उनकी विशेष राज्य के दर्जे वाली बात मान ली गई, तो उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन कर सकती है।

कहां कमजोर हुई टीडीपी?


टीडीपी ने राज्य में किसानों के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू कीं लेकिन बावजूद इसके राज्य के किसान खुश नहीं हैं। यहां स्कूल तो हैं लेकिन उनमें भी कई तरह की परेशानियां हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों की ड्यूटी कई तरह के सर्वे में लगा दी जाती है। जिसके कारण छात्रों को शैक्षणिक वर्ष में 30-40 दिनों का नुकसान होता है। शिक्षकों की इन ड्यूटी के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके अलावा नायडू के रहते हुए राज्य को विशेष दर्जा नहीं मिल पाया है, जिसका असर इस बार उनकी सीटों पर पड़ सकता है। वहीं राजधानी अमरावती में अस्थायी विधानसभा और सचिवालय के अलावा किसी और चीज का निर्माण नहीं हुआ है। कई विकास योजनाएं फंड की कमी के कारण अटकी हुई हैं।

क्यों जरूरी है विशेष राज्य का दर्जा?


आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग ना केवल वहां की जनता बल्कि राजनीतिक पार्टियां भी करती आ रही हैं। चाहे फिर 2014 में भाजपा और टीडीपी का गठबंधन हो या फिर 2019 में रेड्डी द्वारा गठबंधन की बात करना। दोनों ही पार्टियों की गठबंधन के लिए मुख्य शर्त राज्य के लिए विशेष दर्जे की मांग ही रही है। इन पार्टियों का कहना है कि अगर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाता है, तो इससे उन्हें केंद्र की ओर से अधिक फंड मिलेगा। जिसका इस्तेमाल राजधानी के विकास के अलावा अन्य विकास योजनाओं में भी किया जा सकेगा।

चुनाव | 1 year ago

शुरुआती रुझानों में ये भाजपा की ‘लहर’ नहीं सुनामी है,


खास बातें

  • एग्जिट पोल के रुझानों पर मुहर लगती दिख रही है
  • रुझानों में एनडीए 315 सीट के पार
  • भाजपा अपने दम पर ला सकती है बहुमत
  • अमेठी में स्मृति ईरानी और राहुल गांधी के बीच दिख रही है कड़ी टक्कर


लाइव अपडेट

भाजपा की स्मृति ईरानी राहुल गांधी के मुकाबले अमेठी से 4300 वोट से आगे चल रही हैं।

वाराणसी सीट से नरेंद्र मोदी 60 हजार वोट से आगे चल रहे हैं। गठबंधन की शालिनी राय दूसरे तो कांग्रेस के अजय राय तीसरे पायदान पर हैं।


Jammu-Kashmir Lok Sabha Results 2019 Live Updates:

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से नेशनल कॉन्फ्रेंस आगे चल रही है। पीडीपी उम्मीदवार महबूबा मुफ्ती तीसरे पायदान पर हैं। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा 17 सीटों पर तो तृणमूल कांग्रेस 23 सीटों पर आगे चल रही है। 

भोपाल से साध्वी प्रज्ञा 30 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। उनके सामने मैदान में दिग्विजय सिंह हैं।

रुझानों में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद सेंसेक्स ने 40 हजार का आंकड़ा छू लिया है।

मुंबई की सभी 6 सीटों पर भाजपा-शिवसेना आगे चल रहे हैं।

रुझानों में भाजपा अपने दम पर 275 सीट के पार चली गई है। 

दिल्ली की सभी 7 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। 2014 में भी भाजपा ने सभी सीटें जीती थीं।

बिहार में भाजपा गठबंधन 36 सीटों पर आगे चल रहा है। 40 में से महागठबंधन के हाथ सिर्फ 2 सीट लगती दिख रही हैं।

तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम आगे चल रहे हैं। उन्हें यहां से टिकट मिलने के बाद भाजपा और सहयोगी पार्टियों ने काफी सवाल उठाए थे। 


West Bengal Elections Results 2019 Live Updates:

बंगाल में रुझानों के मुताबिक भाजपा 15 और तृणमूल कांग्रेस 20 सीट पर आगे चल रही है।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी रायबरेली से एक बार पिछड़ने के बाद वापस आगे हो गई हैं। 


Punjab Election Results 2019 Live Updates:
आनंदपुर साहिब से कांग्रेस के मनीष तिवारी पीछे चल रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर सीट से 50 हजार वोट से आगे चल रहे हैं। 

नरेंद्र मोदी वाराणसी सीट से 20 हजार वोट से आगे चल रहे हैं।

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 250 सीटों पर एनडीए आगे चल रही है।


Bihar Elections Results Live Updates
बिहार में 29 सीटों पर एनडीए और दो सीटों पर गठबंधन आगे चल रहा है। 

उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर एनडीए 50 सीटों पर आगे चल रही है। ये आंकड़ा कुछ-कुछ एग्जिट पोल की तस्वीर को ही मुकम्मल करता दिख रहा है।

रुझानों में एनडीए 300 सीट के पार चला गया है। यूपीए बहुत पीछे 116 पर अटका है। ये 531 सीटों के शुरुआती रुझान हैं। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से रालोद के मुखिया अजित सिंह पीछे चल रहे हैं। 


Election Result #India

अब तक के रुझानों में एनडीए 290 सीटों पर आगे चल रही है। यूपीए 120 और अन्य को 119 सीट मिलती दिख रही हैं।

बिहार की जमुई सीट से लोजपा के रामविलास पासवान आगे चल रहे हैं।

बंगलूरू दक्षिण से भाजपा के युवा चेहरे तेजस्वी सूर्या आगे चल रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश में एनडीए 48 सीटों पर आगे चल ही है। सपा-बसपा गठबंधन 14 सीटों पर आगे चल रही है। 


Rae Bareli Update:

रायबरेली से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी पीछे चल रही हैं। 

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) आगे चल रहे हैं। 

शेयर बाजार पर भी रुझानों का असर साफ दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स में 600 प्वाइंट की बढ़त देखी जा रही है। 

बेगूसराय सीट से गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) आगे चल रहे हैं। उनके मुकाबले सीपीएम उम्मीदवार कन्हैया कुमार पीछे हैं।

एनडीए को रुझानों में बहुमत मिल गया है। एनडीए 272 सीटों पर आगे चल रही है जबकि यूपीए 116 सीटों पर आगे है। 

Election Commission Official Trends
चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों में भाजपा 133 सीटों पर और कांग्रेस 41 सीटों पर आगे हैं। 


Delhi Lok Sabha Elections Results Live:

दक्षिण दिल्ली से भाजपा के रमेश बिधूड़ी और पश्चिम दिल्ली से प्रवेश वर्मा आगे चल रहे हैं। दोनों साल 2014 के चुनावों में भी विजयी रहे थे।

इलाहाबाद से भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी आगे चल रही हैं। 

गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और जबलपुर से विवेक तन्खा पीछे चल रहे हैं। 


Tamilnadu Election Results Live 2019
तमिलनाडु में एनडीए को झटका लगता दिख रहा है। एनडीए 3 सीटों पर तो यूपीए 22 सीटों पर आगे है।

आजमगढ़ से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आगे चल रहे हैं। निरहुआ पीछे चल रहे हैं। 

रामपुर से भाजपा की जया प्रदा पीछे चल रही हैं। उनके सामने सपा के आजम खान मैदान में हैं।

अब तक के रुझानों में एनडीए 195 सीटों पर आगे हो गई है। यूपीए 100 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अन्य को 60 सीटों पर बढ़त मिली हुई है। 

धनबाद से कीर्ति आजाद पीछे चल रहे हैं। काफी जद्दोजहद के बाद भाजपा के बागी आजाद को धनबाद की सीट दी गई थी।

राजस्थान में 21 सीटों पर अब भाजपा आगे हो गई है। 

अमेठी से राहुल गांधी पीछे चल रहे हैं। भाजपा की स्मृति ईरानी उनसे आगे हो गई हैं। 

गुरदासपुर से सनी देओल आगे।


Maharashtra Election Results Live
मुंबई उत्तर से उर्मिला मातोंडकर पीछे चल रही हैं। 

भोपाल की वीआईपी सीट से साध्वी प्रज्ञा, दिग्विजय सिंह से आगे चल रही हैं। 

अब तक डाक मतपत्रों के आधार पर आए 205 रुझानों में एनडीए 113 सीटों पर आगे है। यूपीए 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

डाक मतपत्रों पर आधारित रुझानों में एनडीए 100 सीटों पर आगे तो यूपीए 54 सीटों पर।

महाराष्ट्र में 11 सीटों पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन आगे चल रहा है।


Uttar Pradesh Elections Results Live Update
उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से भाजपा 7 सीटों पर आगे चल रही है।

एनडीए 52 तो यूपीए 25 सीटों पर आगे चल रही है। ये बेहद शुरूआती रुझान हैं जो पोस्टल बैलेट पर आधारित हैं। 

डाक मतपत्रों की गिनती में एनडीए ने शुरूआती बढ़त बना ली है। एनडीए 42 सीट पर तो यूपीए 20 सीट पर आगे है।


New Delhi Election 2019
नई दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन, मीनाक्षी लेखी के सामने ताल ठोक रहे हैं। माकन ने कहा, “नतीजे कांग्रेस के हक में होंगे। हम उम्मीद कर रहे हैं कि कांग्रेस जीतेगी और सरकार बनाएगी। राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे।”

चुनाव | 1 year ago

मोदी प्रचार संहिता के बीच भाजपा के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक विक्ट्री मशीन’ बन गई है ईवीएम: कांग्रेस

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले कांग्रेस ने ईवीएम और आदर्श आचार संहिता को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों पर वीवीपैट पर्चियों से ईवीएम के मिलान करने की विपक्ष की मांग चुनाव आयोग ने खारिज कर दी, जिसके बाद आयोग के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए आदर्श आचार संहिता ‘मोदी प्रचार संहिता’ बन गई है, जबकि ईवीएम ‘इलेक्ट्रॉनिक विक्ट्री मशीन’ बन गई है।पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मीडिया से ही उन्हें पता चला है कि चुनाव आयोग ने हमारी दो मांगे निरस्त कर दी। पहली मांग मतगणना से पहले पर्चियों के मिलान की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मांग को खारिज करने का क्या औचित्य हो सकता है? इसका क्या आधार है?’

उन्होंने आगे कहा कि हमने यह भी कहा था कि पर्चियों के मिलान में कमी पाई जाती है तो पूरे विधानसभा क्षेत्र में 100 फीसदी पर्चियों का मिलान किया जाए। इस मांग को भी नहीं माना गया। इसमें भी आयोग को क्या दिक्कत हो सकती है?

चुनाव | 1 year ago

साध्वी प्रज्ञा के बयान पर बोले PM मोदी, मैं उन्हें मन से कभी माफ नहीं कर पाऊंगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि महात्मा गांधी पर दिए गए बयान को लेकर साध्वी प्रज्ञा ने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन वे उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा अप्रत्यक्ष तौर पर साध्वी प्रज्ञा की ओर ही था। उन्होंने एक निजी चैनल से साक्षात्कार में कहा, “गांधी जी या गोडसे के बारे में जो बयान दिए गए हैं वो बहुत ख़राब है और समाज के लिए बहुत गलत हैं। ये अलग बात है की उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन मैं उन्हें मन से कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।”
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चुनाव | 1 year ago